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पवित्र गीता Holy Geeta

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-8* November-2020)   Paper Submission: 05/11/2020, Date of Acceptance: 25/11/2020, Date of Publication: 26/11/2020   नसीम फातिमा पूर्व प्रवक्ता, दर्शन शास्त्र विभाग, हनमंतु महाविद्यालय लाहुरपुर, हनमानु गंज, इलाहाबाद, उतर प्रदेश, भारत Abstract   भगवदगीता श्री कृष्ण द्वारा कुरूक्षेत्र में अर्जु न का े दिया गया उपदेश ह ै। जिसमें मानव कल्याण ह ेतु निस्काम कर्म करने का े कहा गया ह ै, गीता ब ्रह्म के दा ेना े रूपों का े मानती ह ै सगुण तथा निर्गुण। इसके अनुसार कर्मो की प ्रधानता दी गयी ह ै कि हम कर्म करते ह ुये सत्य का े प ्राप्त करें ए ेसा कर्म जिसमें र्कोइ  इच्छा, आसक्ति, फलांकाक्षा न हा े, निस्वार्थ भाव से कर्म करें, जिससे हम सा ंसारिक बन्धन में न फ ंसे बल्कि मोक्ष का े प ्राप्त करे, यदि हम सा ंसारिक बन्धन में ही फसे रहे ता े हम कभी भी मोक्ष प ्राप्त नहीं होगा आ ैर हम जीवन-मरण के चक्र में अनेका े बार जन्म लेगे। हमारा जीवन लोक-कल्याण के लिये है जिसको हम निस्वार्थ , निस्काम कर्म करक...