मानवाधिकारः ऐतिहासिक एवं सै ंद्धातिक परिप्रेक्ष्य Human Rights : In Historcial And Theoretical Perspective
Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-8* November-2020) Paper Submission: 15/11/2020, Date of Acceptance: 26/11/2020, Date of Publication: 27/11/2020 राजेश शर्मा सह आचार्य, आर्थिक प्रशासन-वित्तीय प्रबन्ध विभाग राजकीय कन्या स्नात महाविद्यालय,सवाईमाधोपुर, राजस्थान, भारत Abstract 10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की सामान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घा ेषणा का े स्वीकृत एवं घोषित किया। इस घोषणा ने न सिर्फ मनुष्य जाति के अधिकारों का े बढाया वरन् स्त्री आ ैर पुरूषों का े भी समान अधिकार प ्रदान किए। व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता एवं प्रतिष्ठा से सम्बन्धित अधिकारों का े मानव अधिकार माना जाता ह ै। अन्तर्रा ष्ट्रीय सहया ेग के लिए विश्व स्तर पर स्थापित संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भी कतिपय अधिकारों का े मानव अधिकारा ें के समतुल्य माना गया ह ै। इनमें स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार, हिरासत में यातना एवं दुव्र्यवहार नहीं किये...