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क ुषाणा ें के ॉाासनकाल में आयात तथा निर्या त में बन्दरगाहो ं का महत्व Importance of Ports in Import and Export during The Reign of Kushanas

Shrinkhla Ek Shodhparak Vaicharik Patrika  ISSN NO.: 2321-290X RNI : UPBIL/2013/55327 VOL-8* ISSUE-10* June- 2021 Paper Submission: 03/06/2021, Date of Acceptance: 16/06/2021, Date of Publication: 24/06/2021 विवेक कुमार ॉाोधार्थी, इतिहास विभाग, आई0ओ0पी0, वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदे‛ा, भारत लक्ष्मी गौतम एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, आई0ओ0पी0, वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदे‛ा, भारत                                                    Abstract   कुषाणा ें के ॉाासनकाल में विदे‛ाी व्यापार की उन्नति का एक नया अध्याय प ्रारम्भ हुआ। भारत पूर्व तथा प‛िचम के दे‛ाा ें में व्यापार का प ्रमुख केन्द ्र बनकर उभरा। कुषाणों के समय मे ं नए-नए व्यापारिक मार्गाें की खोज की र्गइ । व्यापारिक केन्द्रा ें एवं बंदरगाहों के विकास के फलस्वरूप व्यापारियों के...

नरसि ंहपुर जिले मे ं जनजातियो ं की आर्थि क, सामाजिक एव ं धार्मिक स्थिति Economic, Social and Religious Status of Tribes in Narsinghpur District

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  Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. UPBIL/2016/68367 VOL- VI * ISSUE- IV * May - 2021    Paper Submission: 03/06/2021, Date of Acceptance: 15/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021 कीर्ति रजक शोधार्थी, इतिहास विभाग, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, म.प्र., भारत                                                        Abstract नरसिंहप ुर जिला मध्यप ्रदेश के 52 जिलों मे ं से एक ह ै। यह प ्रदेश के लगभग मध्य में स्थित ह ै। यह जबलपुर संभाग के अ ंतर्गत आता ह ै। जिले म ें निवास करने वाली महत्वपूर्ण जातियाँ ब ्राम्हण, राजपूत, लोधी, नेमा, तेली तथा अनुसूचित जातिया ें में चमार, बसा ेर तथा जनजातियों मे ं आदिवासी गा ेंड ़ आ ैर उनकी उपजातियाँ भरिया, भूमिया, उराव, परध...

आदिवासी प्रान्त मेरवाड़ा मे ं ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी का आ ैपनिव ेशिक प्रभाव Colonial Influence of British East India Company in Tribal Province of Merwara

 Anthology : The Research  ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021 Paper Submission: 04/01/2021, Date of Acceptance: 24/01/2021, Date of Publication: 25/01/2021 जितेन्द्र कुमार मारा ेठिया सह-आचार्य, इतिहास विभाग, सम्राट पृथ्वीराज चैहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर, राजस्थान, भारत abstract उन्नीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक में राजप ूताना के हृदयस्थली क्षेत्र अजमेर के सीमावर्ती क्षेत्रा ें के मध्य स्थित आदिवासी क्षेत्र मेरवाड़ा में 1823 ईके बाद ब्रिटिश सरकार ने सामाजिक, आर्थि क और श ैक्षणिक सुधारों क े प ्रारम्भिक प्रयास किये जा े इस क्ष ेत्र के क्रमिक विकास के आधारभूत कारण बन गये। अ ंग्र ेज शासित मेरवाड़ा का प ्रबन्ध अजमेर के चीफ कमिश्नर द्वारा किया गया। यहाँ पर पानी की कमी तथा पहाड़ी भू-भाग के कारण लूटेरी प ्रव ृतियाॅ विकसित होने लगी। जिस े बि ्रटिश सरकार ने 182र्3 इ . में मेरवाड ़ा बटालियन स्थापित कर शिक्षा के द्वारा यहाँ के संकीर्ण परम्परागत रीति-रिवाजों म ें परिवर्तन कर क्रमिक सुधार किया। आर्थिक समृद्धि ने इस क्षेत्र का े व्यापारिक केन्द्र के ...

राष्ट्रीय आंदोलन में प्रगतिवादी चेतना का उदय (1934-47 की पत्र-पत्रिकाओं के विशेष संदर्भ में) Rise of Progressive Consciousness in the National Movement (With Special Reference to The Periodicals of 1934-47)

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Anthology : The Research   ISSN: 2456–4397   RNI No.UPBIL/2016/68067   Vol-5* Issue-12* March-2021     Paper Submission: 03/03/2021, Date of Acceptance: 22/03/2021, Date of Publication: 25/03/2021 नीरज जायसवाल सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग, शासकीय महाविद्यालय ज ैतहरी अनूपपुर म.प्र. भारत                                                    Abstract   वामपंथी विचारधारा के प्रभाव के फलस्वरुप भारतीय राष्ट्रीय आंदा ेलन एवं साहित्य सर्ज न के क्षेत्र में समाजवादी विचारा ें का प्रव ेश हुआ था। जिसके परिणामस्वरूप 1935 में का ंग्र ेस समाजवादी दल का उदय तथा साहित्य क्षेत्र म ें 1935 में भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई। इन सभी का प्रभाव तत्कालीन पत्रकारिता पर भी पड ़ा था। इन पत्र-पत्रिकाआ ें ने अपने राष्ट्रीय दायित्व...

प्राचीन कालीन भारतीय सामाजिक व्यवस्था का विश्लेषण Analysis of the Indian Social System of Ancient Times

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Shrinkhla Ek Shodhparak Vaicharik Patrika   ISSN NO.: 2321-290X  RNI : UPBIL/2013/55327   VOL-8* ISSUE-7* March- 2021  Paper Submission: 04/03/2021, Date of Acceptance: 15/03/2021, Date of Publication: 25/03/2021   श ेख ताज हसन सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग, शासकीय महाविद्यालय, पथरिया, दमोह, मध्य प्रद ेश, भारत   नीरज जायसवाल सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग, शासकीय महाविद्यालय, ज ैतहरी, अनूपपुर, मध्य प्रद ेश, भारत                                                    Abstract   मनुष्य सामाजिक प्राणी है, समाज से अलग मनुष्य का सामाजीकरण असंभव ह ै। आदिम काल में मनुष्य भोजन एव ं सुरक्षा संब ंधी जरूरता ें के लिए टा ेलिया ें में रहना श ुरू करता है। प्रथम सामाजीकरण यहीं से श ुरू होता ह ै। समय बदलता रहा आ ैर समय के साथ ही सामाजीकरण की यह प्रव ृत्ति नित नए रूप धारण करती रही। शुरुआती दौर में मानव के संब ंध सरलीकृत थे। धीरे-धीरे धर...

उच्च शिक्षा का निजीकरण: विविध आयाम’ 'Privatization of Higher Education: Multiple Dimensions'

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-8* November-2020)   Paper Submission: 05/11/2020, Date of Acceptance: 25/11/2020, Date of Publication: 26/11/2020   वजय सिंह मावई सह आचार्य इतिहास विभाग, राजकीय कन्या महाविद्यालय, सवाई माधोपुर, भारत Abstract   शिक्षा किसी भी देश के विकास की सबसे अहम कड ़ी है। शिक्षा के पद सोपानिक स्वरूप में उच्च शिक्षा उच्चतम स्थान पर स्थित ह ै। उच्च शिक्षा समाज की बा ैद्धिकता की प्रतीक ह ै। उच्च शिक्षा का समुन्नत विस्तार ही राष्ट्र के स्तरा ेन्नयन का मुख्य साधन ह ै। आजादी के उपरान्त हमनें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बह ुत विकास किया ह ै। परन्तु वर्तमान परिदृश्य में उच्च शिक्षा के स्तर का े और ऊॅचाइयों पर ले जाने की आवश्यकता ह ै। शिक्षा विकास की अनिवार्य शर्त है और सरकार के पास इसके लिए पर्या प्त आर्थि क संसाधन नही ह ै। बढ़ती जनसंख्या एवं व ैष्वीकरण के युग में उच्च शिक्षा में संख्यात्मक के साथ-साथ गुणात्मक अभिवृद्धि की महती आवयकता ह ै। ऐसी स्थिति में निजीकरण ही एक उपाय ह ै जिसे कतिपय दिशा-निर्देशों ...

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले मे ं आधुनिक शिक्षा का विकास क ऐतिहासिक विव ेचन (1867 से 1975 ई. तक) Historical analysis of the Development of modern education in Balaghat District of Madhya Pradesh (1867 to 1975 AD)

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021) Paper Submission: 15/01/2020, Date of Acceptance: 26/01/2020, Date of Publication: 27/01/2021   गीता ंजली सरयाम शोधार्थी, इतिहास विभाग, राजकीय स्वायत्तशासी पी.जीकलेज, छिंदवाड़ा, भारत Abstract          मध्यप ्रदेश की सतपुड़ा पर्वतमाला के पूर्वी  भाग में स्थित बालाघाट जिले की राजनीतिक, सामाजिक एवं सा ंस्कृतिक परम्परायंे व ैविध्यप ूर्ण रही है ं। बि ्रटिश शासन की स्थापना के प ूर्व यहाँ के गा ेण्ड तथा मराठा (भोंसला) राजवंशा ें का शासन था। इन शासकों का शिक्षा के विकास के प ्रति दृष्टिकोण सर्व था भिन्न था। यही कारण था कि इनके राज्यकाल में बालाघाट जिले के भू-भाग में शिक्षा की र्कोइ  निश्चित पध्दति प ्रचलित नहीं थी। 185र्4 इ . मंे यह क्षेत्र आ ैपचारिक रूप से बि ्रटिश साम्राज्यन्तर्गत हो गया। उसी समय से यहाँ आधुनिक अथवा पाष्चात्य शिक्षा का प्रादुर्भाव ह ुआ। बालाघाट जिले के श ैक्षणिक विकास का अध्ययन करने पर पता चलता ह ै कि यहाँ शिक्षा के...

सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता स ंग्राम में दलिता ें की भूमिका Role of Dalits in the First Freedom Struggle of 1857

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021)   Paper Submission: 15/01/2020, Date of Acceptance: 26/01/2020, Date of Publication: 27/01/2021 आई. आर सोनवानी प्राचार्य, इतिहास विभाग, शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव, छ.ग, भारत फुलसा े राज ेश पटेल सहायक प्राचार्य, इतिहास विभाग, शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव, छ.ग, भारत Abstract          सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, भारत का प ्रथम स्वतंत्रता संग्राम ए ेतिहासिक, राजनीतिक, आर्थि क एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प ्रसिद्ध है। कई इतिहासकारों ने इसे महान विद्रा ेह, किसानों का विद्रा ेह, सिपाहिया ें के द्वारा असंतुष्ट होकर किया गया सिपाही आन्दोलन तथा राजा-महाराजा या प्रादेशिक राजाआ ें के द्वारा किया गया विद्रा ेह माना है। भारतीय इतिहासकारों ने सर्व मान्य से इस बात को स्वीकार किया ह ै कि, पहली बार भारत के समस्त वर्ग जिसमें राजा-महाराजा, साधारण किसान, हिन्दू-मुस्ल...

प्राचीन भारत मे ं नारियों की स्थिति Status of Females in Ancient India

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021) Paper Submission: 15/01/2021, Date of Acceptance: 26/01/2021, Date of Publication: 27/01/2021   सुर ेश कुमार सान्द ू सहायक आचार्य इतिहास विभाग, राजकीय महाविद्यालय पुष्कर अजमेर, राजस्थान, भारत Abstract           हमारे समाज में महिलाआ ें की स्थिति सदैव एक समान नहीं रही ह ै। इसमें समय समय पर परिवर्तन हा ेते रहे ह ै ं। उनकी स्थिति में व ैदिक युग से लेकर आधुनिक काल तक अनेक पड़ाव आए हैं। व ैदिक एवं उत्तर व ैदिक काल में उसे गरिमामय पद प्राप्त था। स्मृति काल से होते ह ुए पा ैराणिक युग तक व ैदिक युग की देवी पद का े सुशा ेभित करने वाली महिला सहकर्मी  के स्थान पर आ गई थी। The position of women in our society has not always been the same. There have been changes in this from time to time. His position has undergone many stages from the Vedic era to the modern period. He had a dignified position during the Vedic and post-Vedic period. The woman...