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भ ूमण्डलीकरण के युग में स्त्री का बाजारीकरण Comercialisation of Women in The Era of Globalization

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 Anthology : The Research  ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-4* July- 2021 Paper Submission: 02/07/2021, Date of Acceptance: 23/07/2021, Date of Publication: 25/07/2021 गजेन्द्र सि ंह शोधार्थी राजनीति शास्त्र विभाग, राजकीय पी.जी. काॅलेज बाड़मेर, राजस्थान, भारत                                                    Abstract   उदारवादी सोच ने निजीकरण व वैश्वीकरण को जन्म दिया। इस प ्रवाह ने दुनिया व उसकी सा ेच पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दा ेना ें प ्रकार से प ्रभाव डाले। मूलतः आर्थि क सोच ने समाज के मूल अ ंग स्त्री का े बाजारीकरण में धकेल दिया। यह एक ताकत के साथ बाजार की वस्तु भी बना दी गई। यह न केवल भारत बल्कि प ुरी दुनिया में ह ुआ शोध पत्र में स्त्री या ैन दासता, धन की गुलाम स्त्री की स्थिति का अध्ययन किया गया।...

भारत मे ं ग्रामीण विकास प्रशासन एव ं ला ेकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण

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 Anthology : The Research   ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-2* May- 2021   Paper Submission: 01/05/2021, Date of Acceptance: 14/05/2021, Date of Publication: 25/05/2021   रमा शर्मा  एसोसिएट प्रोफेसर राजनीति शास्त्र विभाग, गवर्नमेंट आर्ट ्स कालेज, कोटा, राजस्थान, भारत                                                      Abstract   भारत कृषि प ्रधान ग्राम्याधारित अर्थ व्यवस्था वाला देश ह ै। जिसकी 70 प ्रतिशत जनसंख्या गा ंवों में निवास करती है। हमारी ग्रामीण जनता का े मुख्यधारा में लाने के लिए एवं लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण की प ्रक्रिया को निम्न पायदान पर स्थित व्यक्ति तक पह ुंचाने के लिए 73व ें संविधान संशोधन के द्वारा त्रिस्तरीय प ंचायती राज व्यवस्था का े अधिक सशक्ती...

विद्यालयी शिक्षा - समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता (डाॅ.ला ेहिया के विचारो ं मे ं) School Education - Need For A Holistic Approach (In Dr. Lohia's Thoughts)

  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)   Paper Submission: 05/12/2020, Date of Acceptance: 23/12/2020, Date of Publication: 24/12/2020   प्रेमलता मिश्रा सहायक प्राध्यापक, राजनीति शास्त्र विभाग, गवर्नमेंट के. आर. डी कलेजमुंगेली रोड, नवागढ़, बेमेतरा, छत्तीसगढ ़, भारत Abstract   शिक्षा का महत्व सर्वविदित है, कोई भी समाज आ ैर राज्य शिक्षा की अवहेलना कर स्वयं को गर्त में ढकेलने का दुस्साहस नही ं करेगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल रा ेजगार प ्राप्ति हेतु सक्षम होना ही नही ं ह ै, बल्कि मानव गुणों का विकास तथा समाज एवं राज्य के साथ सकारात्मक तारतम्य स्थापित करना भी है। स्वयं तथा अपने क्षेत्र समाज व राज्य का विकास ही शिक्षा का मूल उद्देश्य हा ेना चाहिये। The importance of education is well known, no society and state will dare to defy education and push themselves into the trough. The aim of education is not only to be able to get employment, but also to develop human qualities and establish positive relations wi...