Posts

Showing posts with the label समाजशास्त्र विभाग

भारत में नगरीय समाज एक विश्ल ेषण An Analysis of Urban Society in India

Image
Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. UPBIL/2016/68367 VOL- VI * ISSUE- IV * May - 2021    Paper Submission: 03/06/2021, Date of Acceptance: 15/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021                                        जितेन्द्र कुमार अहिरवाल अतिथि विद्वान - समाजशास्त्र, समाजशास्त्र विभाग, शास. महाविद्यालय सिलवानी, रायसेन, मध्य प्रदेश, भारत Abstract     भारत में नगरीय समाज की अवधारणा र्कोइ  नवीन अवधारणा नहीं है भारत में नगरीय समाज की अवधारणा नगरों की उत्पत्ति तथा उसक े विकास के इतिहास से जुड़ी ह ुई ह ै। यदि हम भारतीय नगरा े के सन्दर्भ  में, अतीत म ें देख े ता े विभिन्न प ्राचीन ऐतिहासिक तथा धार्मिक नगरा ें का स्वरूप देखने को मिलता है प ्राप्त इतिहास के आधार पर अध्ययन करें ता े अति प्राचीन काल में सिन्ध ु सभ्यता से जुड़े हड ़प्पा तथा मा ेहन जा ेदड ़ों नामक नगरा ें का स्वरूप सामने आता ह ै। ‘‘नगरीय समाज का...

ग्रामीण समाज मे ं जाति प्रथा का महत्व Importance of Caste System in Rural Society

Image
 Anthology : The Research  ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-3* June- 2021 Paper Submission: 02/06/2021, Date of Acceptance: 15/06/2021, Date of Publication: 24/06/2021 जितेन्द्र कुमार अहिरवाल अतिथि विद्वान, समाजशास्त्र विभाग, शास. महावि. सिलवानी रायसेन, मध्य प्रदेश, भारत                                                    Abstract   मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज में रहने के नाते ऐसा नहीं हा ेता है कि वह सामाजिक नियमा ें स े प्रभावित हुये बगैर रह सकता हा े अतः भारतीय समाज आ ैर विशेषतः ग्रामीण समाज प्रमुख रूप से जाति प्रधान समाज है। यहां सामाजिक स्तरीकरण प्रमुख आधार जाति प्रथा ही है। इस समय हमें देश म ें अनगिनत जातियाँ तथा उपजातियाँ है। प्रत्येक जाति की अपनी-अपनी विशेषताएँ हैं। वास्तव में जाति व्यवस्...

भारत में जलसंकट की समस्या: चुनौती एवं समाधान Water Crisis Problem in India: Challenges and Solutions

Image
  Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. UPBIL/2016/68367 VOL- VI * ISSUE- IV * May - 2021   Paper Submission: 00/00/2020, Date of Acceptance: 00/00/2020, Date of Publication: 00/00/2020  सुशील कुमार सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, शिवपति पी.जी. कालेज, शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश, भारत                                                      Abstract जल संकट की समस्या विश्वस्तरीय चुनौती बनकर हमारे समक्ष खड़ी हो गयी ह ै। समस्त विश्व में स्वच्छ जल अधिकाधिक दुर्लभ होता जा रहा ह ै। वन कटान एवं वन विनाश के कारण भूतल पर जल का बहाव तेज हा े रहा है। वनस्पतियां नष्ट हो रही है, परिणाम स्वरूप पानी के भूगर्भ  में रिसने का समय न मिलने के कारण भूमिगत जल का स्तर कम हो रहा ह ै...

प्रवास और सामाजिक विकास Migration and Social Development

Image
Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. UPBIL/2016/68367  Vol.-6* Issue-4* May- 2021 Paper Submission: 04/05/2021, Date of Acceptance: 21/05/2021, Date of Publication: 23/05/2021   धनश्याम सैनी सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, श्री कल्याण राजकीय कन्या महाविद्यालय, सीकर, राजस्थान, भारत                                                        Abstract   संसार मे व्यक्तिया ें के जीवन का े समग्र रूप से प ्रभावित करने वाली शक्ति सामाजिक गतिशीलता ह ै। यह गतिशीलता प ्रवास के रूप मे सामने आती ह ै जो बाध्यतावश या स्वर्णि म जीवन अवसर की तलाश मे होता ह ै। आव्रजन- प ्रवजन की प्रघटना विश्व के सभी समाजा े मे प्राचिन काल से ही निरन्तर द ेखने का े मिलती है। प्रवास विकास का े प ्रभावित क...

भारत में किशोर अपराधः समस्या एव ं समाधान Juvenile Crime in India: Problem and Solution

Image
  Anthology : The Research   ISSN: 2456–4397   RNI No.UPBIL/2016/68067   Vol-6* Issue-1* April-2021 Paper Submission: 02/04/2021, Date of Acceptance: 14/04/2021, Date of Publication: 25/04/2021   कृष्ण मुरारी गुप्त सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, सन्त विनोबा स्नातकोŸार महाविद्यालय, द ेवरिया, उ0प्र0, भारत                                                    Abstract   परिवर्तन की विभिन्न प्रक्रियाओ ं में नगरीय जीवन में जा े विषम समस्या ह ैं कि उसमें किशोर अपराध एक प्रमुख समस्या ह ै। यह एक ऐसी समस्या ह ै जो घटने के बजाए दिन प्रतिदिन बढ़ता ह ुआ नजर आ रहा है देश के प्रत्येक क्षेत्र म ें किशा ेर अपराध का रूप देखा जा सकता ह ै। आ ैद्या ेगीकरण, नगरीकरण, पाश्चात्य शिक्षा, विघटित परिवार, बेरा ेजगारी, गरीबी, गंदी...

अस ंगठित क्ष ेत्र क े भवन निर्माण श्रमिका ें पर घातक कोरोना वायरस का दुष्प्रभाव The Impact of Deadly Corona Virus on The Construction Workers of The Unorganized Sector.

Image
  Anthology The Research: ISSN: 2456– 4397   RNI No. UPBIL/2016/68067 Vol.-6*   Issue-1*  April-2021 ) Paper Submission: 02/04/2021, Date of Acceptance: 23/04/2021, Date of Publication: 25/04/2021   राजश्री शास्त्री शोध निद ेशक, समाजशास्त्र विभाग, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, म॰प्र॰, भारत मयंक दीक्षित शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, बरकत ुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल, म॰प्र॰, भारत                                                Abstract   का ेरोना वायरस, का ेविड-19 का संक्रमण चीन के वुहान शहर स े प्रार ंभ होकर संपूर्ण विश्व म ें फ ैल चुका ह ै। इस संक्रमण क े प्रसार की गति तथा प्रकृति का े द ेखत े ह ुए इसकी रा ेकथाम का एकमात्र उपाय सामाजिक द ूरी बनाए रखना है। भवन निर्माण श्रमिक प्रायः प्रवासी प्रवृत्ति के हा ेते ह ैं, जा े...

भारत में किशोर अपराधः समस्या एव ं समाधान Juvenile Crime in India: Problem and Solution.

Image
  Anthology The Research: ISSN: 2456– 4397   RNI No. UPBIL/2016/68067 Vol.-6*   Issue-1*  April-2021 )    Paper Submission: 02/04/2021, Date of Acceptance: 14/04/2021, Date of Publication: 25/04/2021     कृष्ण मुरारी गुप्त सहायक प्राध्यापक, समाज“ाास्= विभाÛ, सन्त विनोबा स्नातकोŸार महाविद्यालय, द ेवरिया, उ0प्र0, भारत                                               Abstract   परिवर्तन की विभिन्न प्रक्रियाओ ं में नगरीय जीवन में जा े विषम समस्या ह ैं कि उसमें किशोर अपराध एक प्रमुख समस्या ह ै। यह एक ऐसी समस्या ह ै जो घटने के बजाए दिन प्रतिदिन बढ़ता ह ुआ नजर आ रहा है देश के प्रत्येक क्षेत्र म ें किशा ेर अपराध का रूप देखा जा सकता ह ै। आ ैद्या ेगीकरण, नगरीकरण, पाश्चात्य शिक्षा, विघटित परिवार, बेरा ेजगारी, गरीबी, गंदी बस्तिया ें, जनस ंचार के साधन (मा ेबाइल व ेब आदि) ने अधिकाधिक मात्रा में व ृद्धि करने में अपनी प्रमुख भ ूमिका अद...

प्रवास और सामाजिक विकास Migration and Social Development

Image
  Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. .UPBIL/2016/68367 VOL- VI * ISSUE- IV * May - 2021    Paper Submission: 04/05/2021, Date of Acceptance: 21/05/2021, Date of Publication: 23/05/2021                                                           धनश्याम सैनी सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, श्री कल्याण राजकीय कन्या महाविद्यालय, सीकर, राजस्थान,  भारत  Abstract संसार मे व्यक्तिया ें के जीवन का े समग्र रूप से प ्रभावित करने वाली शक्ति सामाजिक गतिशीलता ह ै। यह गतिशीलता प ्रवास के रूप मे सामने आती ह ै जो बाध्यतावश या स्वर्णि म जीवन अवसर की तलाश मे होता ह ै। आव्रजन- प ्रवजन की प्रघटना विश्व के सभी समाजा े मे प्राचिन काल से ही निरन्तर द ेखने का े मिलती है। प्रवास विकास का े प ्रभावित करने वाला कारक ह ै। विकास ए ेसे परिवर्तना े का े लक्षित करता है जा े प्रगति की ओर उन्मुख...

कोयला खनिक तथा कोयला खाना ें मे ं दुर्घटनाये ं एव ं जोखिम का द्वैतीयक आकड़ो ं पर आधारित अध्ययन Biological Data Based Study of Accidents and Risks in Coal Miners And Coal Mines

  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 VOL- V * ISSUE- V * August - 2020   )   Paper Submission: 00/00/2020, Date of Acceptance: 00/00/2020, Date of Publication: 00/00/2020   आर.एस.त्रिपाठी प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, , शासकीय महाविद्यालय, बड़वारा, कटनी, म-प्र-, भारत दीपमाला तिवारी शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रद ेश, भारत Abstract   प ्रस्तुत शोध पत्र कोयला खान क्षेत्र में दुर्घ टनायें आ ैर खनिका ें के जा ेखिम (खतरे) भरे जीवन आ ैर कार्य के प ्रमुख स्थितिया ें पर विश्लेषण है। वर्तमान में तकनीकी उन्नति आ ैर नवाचारों से खनन को सुरक्षित आ ैर मानव हानि से बचाने का निरंतर प ्रयोग किया जा रहा ह ै। भारत में लाखों की संख्या में का ेयला श्रमिक ह ैं जो चासनाला खान दुर्घटना (झरिया) इतिहास से परिचित ह ैं। 1815 से 2015 क े 200 वर्षों में अनेक बड ़ी दुर्घ टनायें ह ुयी ह ैं, इससे का ेयला खानों में मशीना ें के अधिक खानों का राष्ट्रीयकरण (1971-72) आ ैर अब निजीकरण तथा कोयला ब्लाका ें के निजीकरण प्रक्र...

शिक्षा में उपभोक्तावादी प्रवृति के प्रचलन से प्रभावित जीवन मूल्य Life Value Affected By The Trend of Consumerist Trend In Education

Image
  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)   Paper Submission: 15/12/2020, Date of Acceptance: 26/12/2020, Date of Publication: 27/12/2020   मंज ू गुप्ता सह आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, राजकीय कला महाविद्यालय, कोटा, राजस्थान, भारत Abstract   आज जब नई शिक्षा नीति तैयार की जा रही ह ै तो मूल्या ें की शिक्षा की आवश्यकता को नकारा नहीं जाना चाहिए। भारत में मूल्या ें की शिक्षा के विमर्श की वैदिक काल से ही समृद्ध परम्परा रही ह ै। कमी ह ै ता े विमर्श  को स्कूली शिक्षा में ठीक से लागू करना। चह्वाण समिति ने सत्य, धर्म (सही आचरण), शान्ति, प्रेम, अहिंसा का े मूल्य शिक्षा में व ैश्विक आधार बिंदु माना ह ै। सभी पन्थों म ें इनकी स्वीकार्यता रही ह ै। मूल्या ें की शिक्षा एक विषय के रूप म ें नहीं देकर सम्प ूर्ण माध्यमिक शिक्षा का ध्येय ही संस्कारा ें का निर्मा ण हो। अच्छे शिक्षक ही अपने व्यवहार से बच्चा ें में अच्छे संस्कार प ैदा कर सकते ह ै ं। स ंस्कार उत्पन्न करने में भाषा का बहुत महत्त्व होता ह ै। वर्तमान भारत में अंग्...

भारत की सांस्कृतिक विरासत Cultural Heritage of India

Image
  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)   Paper Submission: 12/12/2020, Date of Acceptance: 26/12/2020, Date of Publication: 27/12/2020   कमलेश कुमार सिंह सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, रा0स्व0ग्रा0उ0पी0जी0 कालेज, पुखरायां कानपुर द ेहात उ॰प्र॰ भारत Abstract     भारतीय संस्कृति के संश्ल ेषण एवं समन्वय का इतिहास बह ुचर्चित अनुमान के अनुसार पांच हजार वर्षो की अवधि से माना जाता है। भारतीय संस्कृति व सभ्यता विश्व की सर्वा धिक प्राचीन एवं सम ृद्ध संस्कृति व सभ्यता है। इसे विश्व की सभी संस्कृतिया ें की जननी माना जाता है। जीने की कला में विज्ञान हो या राजनीति का क्षेत्र भारतीय संस्कृति का सदैव विशेष स्थान रहा है। मानव मंे ही वह अद्भ ुत शक्ति व क्षमता मौजूद है कि वह संस्कृति का निर्माता कहलाने का अधिकारी है। मानव इसलिये मानव ह े कि उसके पास संस्कृति है। संस्कृति के अभाव में मानव को पशु से श्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता। मानव शास्त्र में संस्कृति शब्द का प्रया ेग भिन्न अर्था े में ह ुआ है। मजूमदार एवं मदा...