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प्राचीन भारत मे ं साझेदारी व्यापार-व्यवहार Partnering Business Practices in Ancient India

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021) Paper Submission: 15/01/2021, Date of Acceptance: 26/01/2021, Date of Publication: 27/01/2021   प्रताप विजय कुमार सहयुक्त आचार्य प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्क ृति विभाग, हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद, संत कबीर नगर, भारत Abstract           प ्राचीन भारत में सहकारिता या संघटक की भावना सर्वप्रथम आर्थिक क्षेत्र में स्पष्ट रूप में विद्यमान दिखायी देती ह ै। ब ृहदारण्यक उपनिषद् के एक प ्रसंग में उल्लेख है कि ब ्राह्मण, क्षत्रीय, व ैश्य, शूद्र मानवीय समाज के चार वर्णो के अनुरूप ब ्रह्मा ने देवताआ ें मंे भी वर्गी करण किया था, परन्तु केवल प ्रथम दा े वर्गो के निर्मा ण से व े इसलिए संतुष्ट नही रह े, क्या ेकि ये दा ेना े वर्ग सम्पत्ति उपार्जित नहीं कर सकते थ ें। अतः सम्पत्ति उपार्जन के निमित्त व ैश्यांे की उत्पत्ति की गयी जिन्ह े गणशः संज्ञा से अभिहीत किया गया ह ै। ये गणशः व्यक्तिगत प ्रयास से नही अपितु सहकारिता की प ्रव ...