अद्वैत वेदान्त मे ं ब्रह्मभाव Brahmabhava in Advaita Vedanta
Remarking An Analisation ISSN NO.: 2394-0344 RNI No.UPBIL/2016/67980 VOL-6* ISSUE-3* June- 2021 Paper Submission: 01/06/2021, Date of Acceptance: 15/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021 राजेश्वर सिंह सह आचार्य, दर्शनशास्त्र विभाग, बी0आर0ए0 बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार, भारत Abstract अद्वैत व ेदान्त का े अत्यन्त अल्प शब्दा ें में संक्ष ेपिकृत किया जा सकता ह ै- ‘एक मात्र ब ्रह्म की सत्ता ह ै, जगत् पूर्णतया असत् ह ै और जीव ब ्रह्म से प ृथक् नही ं ह ै।’ वस्तुतः अद्वैत व ेदान्त में ब ्रह्म एवं आत्मा पर्या यवाची शब्द हैं। ब ्रह्म को जानने वाला ब ्रह्म ही हो जाता है। मोक्ष ब ्रह्मभाव या ब्रह्मसाक्षात्कार ह ै। शास्त्र ब ्रह्मज्ञान का केवल ज्ञापक ह ै, कारक नहीं। यह अपरा ेक्ष अनुभव है। Advaita Vedanta may be summarized in half a verse which runs as follows - Brahman is the only reality; the world is ultimately false, and the individual soul is non-different from Brahman. Actually, Brahman and Atman are synonymous terms in ...