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महाकवि भारवि की काव्यशास्त्रीय विशेषता Poetic Feature of The Great Poet

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067  Vol-5* Issue-8* November-2020)   Paper Submission: 15/11/2020, Date of Acceptance: 25/11/2020, Date of Publication: 26/11/2020   विद्या विन्द शोध छात्रा, संस्क ृत विभाग, राम अवध यादव, गन्ना कृषक महाविद्यालय, शाहगंज, जौनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत Abstract   महाकवि भारवि की एकमात्र रचना किरातार्जुनीयम् ह ै। महाकवि भारवि की गणना संस्कृत के श्र ेष्ठ महाकाव्यों में की जाती है। किरातार्जु नीयम् 18 सर्गों में निबद्ध महाकवि भारवि का एकमात्र महाकाव्य ह ै। जिसमें का ैरवा ें पर विजय प ्राप्ति के लिए अर्जु न का हिमालय पवर्त पर जाकर तपस्या करने, किरात वेशधारी शिव से युद्ध और प ्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्ण न है। सर्ग के आरम्भ में वनेचर द्वैतवन म ें निवास कर रहे युधिष्ठिर के समक्ष आता ह ै। आ ैर दुर्या ेधन की राज्यस्थिति तथा उनके मना ेभावा ें को जानकर प ुनः द्वैतवन में आकर युधिष्ठिर का े बताता ह ै। महाकाव्य का प ्रथम सर्ग राजनीतिक विषय का भण्डार ह ै। कवि द्वारा सुन्दर उक्तिया ें के माध्यम ...

ैश्वीकरण एव ं विश्वशान्ति में वैदिक दर्श न की प्रास ंगिकता ः एक अध्ययन The Relevance of Vedic Philosophy in Globalization and World Peace: A Study

  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)   Paper Submission: 10/12/2020, Date of Acceptance: 24/12/2020, Date of Publication: 25/12/2020   मूल चन्द सह आचार्य, संस्क ृत विभाग, राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू, राजस्थान, भारत Abstract   व ैश्वीकरण के दौर में सम्प ूर्ण विश्व वर्तमान में सीमाविवाद, नक्सल भेद, जातिवाद, आतंकवाद, अलगाववाद, धर्म, का ेरा ेना महामारी इत्यादि कई समस्याओं से जूझ रहा ह ै। विश्व में कई देश प्रायः बिना मेहनत के धनार्जन करना चाहते ह ै ं। भिन्न-भिन्न देशों के धनार्जन के तरीके भी पृथक्-पृथक् हो सकते ह ैं। दुनिया में दा े तरह के व्यक्ति होते ह ै ं नियतिवादी तथा प ुरुषार्थवादी। नियतिवार्दी इ श्वर पर विश्वास रखकर जो मिलता ह ै उसस े सन्तुष्ट हा े जाते ह ैं, प ुरुषार्थ वादी मेहनत करके धनार्जन करते ह ैं। तीसरी प्रकृति के व े व्यक्ति हा ेते ह ैं जा े दोना ें से ही भिन्न पाये जाते ह ैं। वे डराकर, धमकाकर, दबाकर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते ह ैं तथा धनार्जन करना चाहते ह ैं। वर्तमान में विश्व के ...