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यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ के उपन्यासा ें मे निहित मानवीय मूल्या ंे का शिक्षा में योगदान Contribution of Human Values Contained in The Novels of Yadvendra Sharma 'Chandra'

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 Anthology : The Research  ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-1* April-2021 Paper Submission: 01/04/2021, Date of Acceptance: 16/04/2021, Date of Publication: 25/04/2021 नर ेश कुमार शोधार्थी, हिंदी विभाग, सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी, झुंझुनू, राजस्थान, भारत                                                      Abstract   समाज के विकास में मूल्या ें का े ही आर्दश मान्यता, सामाजिक आचार संहिता, आका ंक्षा आ ैर कल्याणकारी रास्ता माना ह ैं।यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ एक सशक्त उपन्यासकार रहे ह ंै। उनका बहु आयामी व्यक्तित्व एव ं कृत्तित्व प्रतिभा सम्पन्न साहित्यकार के रूप में विख्यात ह ै। उपन्यास साहित्य में मनुष्य जीवन के सभी पक्षों का यथार्थ चित्रण होता ह ै। भारतीय वंश में स्थापित संस्कृति व सभ्यता मे...

समकालीन हिंदी-उर्द ू नाटकों के विकास मे ं एस. एमअजहर आलम की भ ूमिका Role of M. S. Azhar Alam in The Development of Contemporary Hindi-Urdu Dramas

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 Innovation : The Research Concept  ISSN No. 2456–5474   RNI No. UPBIL/2016/68367  Vol.-6* Issue-5* June- 2021   Paper Submission: 04/06/2021, Date of Acceptance: 15/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021   इबरार खान शोधार्थी, हिंदी विभाग, कल्याणी विश्वविद्यालय, कल्याणी, नदिया, पश्चिम बंगाल, भारत                                                    Abstract   हिंदी-उर्दू नाट्यकला आ ैर संस्कृति के विकास के उद्देश्य से गठित नाट्य संस्था ‘लिटिल थेस्पियन’ के संस्थापक एवं विभिन्न रंग सम्माना ें से सम्मानित ‘एस एम. अजहर आलम’ एक प्रसिद्ध रंगकर्मी  थ ें । वर्ष 1987 से इनका नाट्य सफर आरम्भ ह ुआ आ ैर अपने जीवन के अ ंतिम समय (अप्रैल 2021) तक वह लगातार रंग जगत में सक्रिय रहे । अपने 33 वर्ष के नाट्य सफर में वह निरंतर हिंदी-उर्दू नाटकों के विकास के लिए कार्यरत रहे । अतः समकालीन हिंदी-उर्दू नाटकों के विकास में उनके या ेगदान , उनक...

समकालीन कविता के वर्तमान स दर्भ Current References to Contemporary Poetry

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Innovation : The Research Concept (ISSN: 2456–5474    RNI No. .UPBIL/2016/68367 VOLVol.-6* Issue-1* February- 2021)   Paper Submission: 15/02/2021, Date of Acceptance: 26/02/2021, Date of Publication: 27/02/2021   सुनीता सैनी सहा. आचार्य, हिंदी विभाग, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर, राजस्थान, भारत                                                      Abstract         समय साप े{ा व सदेय कविता ही समकालीन कविता ह ै। 1960 के बाद से वर्तमान 20वी ं-21वीं सदी की समकालीन कविता के नवीन व परिवर्तित स्वरूप का े देखा जा सकता है। बदलते सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक परिवेश को कविया ें ने विस्तृत फलक पर उतारा ह ै। जीवन के सं?ार्ष , परिवर्तन, समस्या, पीड़ा, परिवर्तित जीवन मूल्या ें का े अभिव्यक्ति देती कविता श्रेष्ठ व सार्थ क को संर{िात करने का े सचेत करती ह ै। सामान्य व्यक्ति की पीड़ा कवि के काव्य में मर्मस्पर्शी संव...

हि ंदी के स ूफी प्रेमाख्यान काव्य में लोकाचार Ethos in Hindi Sufi Premeditation

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)   Paper Submission: 15/12/2020, Date of Acceptance: 26/12/2020, Date of Publication: 27/12/2020   स ंगीता गर्वा सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, ग्रामीण महिला महाविद्यालय सीकर राजस्थान, भारत Abstract   हंदी साहित्य में प्रेमाख्यान काव्य की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इस काव्य परंपरा में मुस्लिम सूफी कवि तथा गैर म ुस्लिम कविया ें ने प्रचलित तथा प्रसिद्ध प्रेम कहानियों का े लेकर अन ेक प्रबंध काव्या ें की रचना की ह ै।  प्रस्तुत शोध लेख म ें हि ंदी के प्रमुख प्रतिनिधि कविया ें की रचनाओं को ही विवेचन का आधार बनाया गया है। इसके अंतर्गत मुल्ला दाऊद की चा ंदायनए क ुतुबन कृत मिरगावती, मलिक मुहम्मद जायसी की पदमावत, मंझनकृत मध ुमालती तथा उसमान कवि कृत चित्रावली नामक ग्र ंथा ें का े विषय के प्रतिपादन के लिए केंद्र म ें रखा है। प्रस्तुत शोधपत्र में हि ंदू समाज के रीति.रिवाज आ ैर लोकाचारों का निरूपण किया गया है। सूफी कविया ें न े न केवल भारत क े हि ंदू समाज का े बह ुत निकट से देख...

दलित साहित्य में सा ैन्दर्य Beauty In Dalit Literature

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  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-11* February-2021 )   Paper Submission: 15/02/2021, Date ofAcceptance: 25/02/2021, Date of Publication: 26/02/2021   मन्न ूराम मीना सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय दौसा, राजस्थान, भारत Abstract   दलित शब्द संस्कृत क े धातु दल से बना है जिसका अर्थ है तोड़ना, क ुचलना। संस्कृत भाषा शब्दकोशा ें में दलित शब्द के विभिन्न अर्थ बताएं हैं जिनमें दलित, दला गया, मर्दित पीसा गया आदि। हि ंदी -अंग्रेजी शब्दों की चर्चा  की जाए तो डिप्रेस्ड व ड्रराउनट्रोडेन शब्द दलित क े लिए प्रयोग में लिए है। हिंदी शब्दकोशा ें में भी मसला हुआ, रौंदा हुआ, खंडित, विनिष्ट किया हुआ जैसे शब्द दलित शब्द क े अर्थ के रूप में प्रयोग किया गया है। दलित साहित्य वह साहित्य है जो दलित जीवन और उसकी समस्याओं पर लिखा हुआ है। दलितों को हि ंदू समाज व्यवस्थाकारों द्वारा सबसे नीचे पायदान पर रखे जाने के कारण उन्हें हेय, अछूत मानते हुए न्याय, शिक्षा, समानता तथा स्वतंत्रता आदि मौलिक अधिकारों से भी वंचित रखा गया।...

साधो देखो जग बौराना (संत साहित्य मे ं प्रगतिशील दृष्टि) Sadho Dekha Jag Borana (Progressive Vision in Saint Literature)

  Anthology The Research: (ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021) Paper Submission: 15/01/2020, Date of Acceptance: 26/01/2020, Date of Publication: 27/01/2021 शशिकला राय सह.प्राध्यापक हिंदी विभाग, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पुणे, महाराष्ट्र, भारत   Abstract           संत साहित्य के प्रदेय प्रासंगिकता आ ैर पुनर्मूल्यांकन के दृष्टिका ेण की गहन विव ेचना इस शोध आलेख का प्रमुख उद्देश्य ह ै । अध्ययन अध्यापन की परिपाटी में इस तरह की विवेचना समय विशेष के समाज आ ैर संस्कृति को समझने में विश ेष रूप से सहायक हा ेता है । संत साहित्य अपने समय के लोक चित्त का इ ंद्रधनुष ह ै। इसकी पुनर्व ्याख्या इसे अग्रगामी बनाने की ही एक कड़ी ह ै । An in-depth discussion of the deliverable relevance of saint literature and its approach to reevaluation is the major objective of this research article. This type of investigation is particularly helpful in understanding the society and culture of the time in the practice of...