समाज दर्शन की दृष्टि से मानव एवं समाज के लक्ष्य
Periodic Research (P: ISSN No. 2231-0045 RNI No. UPBIL/2012/55438 VOL.-7, ISSUE-4, May-2019 E: ISSN No. 2349-9435)
Abstract
असिस्टेंट प्रोफेसर,
दर्शनशास्त्र विभाग,
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,
वाराणसी
समाज दर्शन समाज एव ं मानव के लक्ष्यों पर दार्शनिक दृष्टि स े
विचार करता है, जिसम ें वह मानव एव ं समाज के लक्ष्यों का अध्ययन तात्त्विक
एव ं सूक्ष्म दृष्टि से करता ह ै। भारतीय एव ं पाश्चात्य समाज का अध्ययन करन े
के बाद समाज दर्शन निष्पक्ष रूप से मानव एव ं समाज के लक्ष्यों की प ृष्ठभ ूमि
पर विचार करते हुए अपना समाला ेचनात्मक मत व्यक्त करता है। समाज दर्श न
अपने निष्पक्ष समालोचनात्मक अध्ययन म ें पाता है कि समाज क लक्ष्य समाज
की सरकारी व्यवस्था के अनुसार बदलत े रहें है, परन्तु आध ुनिक य ुग म ें प ्रायः
विश्व के अधिकांश समाज लोतान्त्रिक लक्ष्यों स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्त्व एव ं
न्याय में विश्वास करते है और मानव के लक्ष्यों की दृष्टि से विश्व समाज म ें
हम ें मानव के लक्ष्य किसी न किसी रूप म ें भारतीय परम्परा के प ुरूषार्थ धर्म ,
अर्थ, काम और मोक्ष ही दिर्खाइ द ेते है।
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