वैदिक ऋचाओं में संकलित वैज्ञानिक तथ्य
Periodic Research (P:
ISSN No. 2231-0045 RNI No. UPBIL/2012/55438 VOL. -5, ISSUE-4, May - 2017 E:
ISSN No. 2349-9435)
Abstract
प्राचार्या,
संस्कृत विभाग,
डी. बी.(पी. जी.) महाविद्यालय,
खेरली, अलव
व ेद ज्ञान के अजस ्र स्त्रोत ह ै। व ैदिक ऋचाआ ें में व ैज्ञानिक तथ्या ें के
अपूर्व भण्डार ह ैं। इन ऋचाआ ें में विज्ञान की समस्त शाखाओं का ज्ञान
समाहित ह ै। ऋग्वेद, यजुर्व ेद, अथर्ववेद इन तीनों ही व ेदा ें में विज्ञान का ज्ञान
ह ै। समस्त व ेदा ें के व ैज्ञानिक आधार पर निष्कर्ष निकलता ह ै कि अथर्वा ऋषि
विश्व के प ्रथम वैज्ञानिक ह ैं। व ैदिक ऋषि वैज्ञानिक शा ेधकर्ता थ े। भा ैतिक
विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, जन्तु विज्ञान, कृषि विज्ञान, गणित शास्त्र
आयुर्वेद आदि समस्त विज्ञान की शाखाओं के ज्ञाता थ े, आविष्कारक थे।
गुरूत्वाकर्ष ण का रहस्य बताने वाले भास्कराचार्य ने अपने सिद्वान्त शिरोमणि
ग्रन्थ में गुरूत्वाकर्षण के नियम के विषय में बताया। ‘पृथ्वी अपने आकाश का
पदार्थ स्व शक्ति से अपनी ओर खींच लेती ह ै। इस कारण आकाश का पदार्थ
प ृथ्वी पर गिरता ह ै‘। इसस े सिद्ध होता ह ै कि भास्कराचार्य ने गुरूत्वाकर्ष ण का
शोध - न्य ूटन से 500 वर्ष पूर्व लगाया। जा ॅन डाॅल्टन के 2500 वर्ष पूर्व
आचार्य कणाद ने ‘द्रव्य के परमाण ु‘ होते ह ैं, का अन्व ेषण कर दिया। इस
प ्रकार कणाद परमाण ु शास्त्र के जनक ह ै ं। आचार्य चरक आ ैषधि शास्त्र,
आयुर्वेद के अन्व ेषणकर्ता थे।
सुश्रुत प ्रथम शल्य चिकित्सक थे। ऋषि भारद्वाज राइट बंध ुआ े से
2500 वर्ष पूर्व वायुयान के खा ेजकर्ता थ े। अतः समस्त व ैज्ञानिक अन्वेषण,
अनुसंधान कर व ैदिक ऋषियांे ने उनका संकलन व ेदा ें में किया।
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