बलात्कार से पीड़ित दलित महिलाएँः एक अध्ययन (Dalit women suffering from Rape: A Study)
Srinkhala Ek Sodhparak
Vaicharik Patrika (P: ISSN NO.: 2321-290X RNI : UPBIL/2013/55327
VOL-8* ISSUE-5* January- 2021 E: ISSN NO.: 2349-980X)
Paper Submission: 15/01/2021, Date of Acceptance: 26/01/2021, Date of Publication: 27/01/2021
Abstract
सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग,
शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दमोह,
मध्य प्रदेश, भारत
शारीरिक आघात से कही अधिक पीड़ा दायक मानसिक आघात होता
ह ै। जिसमें पीड़ित व्यक्ति जीवन पर्यन्त पीड़ा का अनुभव करता ह ै। सामाजिक
दृष्टिकोण से निम्न जातिया ें का े निरंतर सामाजिक अपमान का सामना करना
पड़ता ह ै ं वही समाज में स्त्री का े भी इस पुरूष प ्रधान समाज में दलिता ें की
तरह व्यवहार किया जाता है। एक दलित परिवार में जन्मी महिला को ता े
दलिता ें के भी दलित समझा जाता ह ै। और वह समाज एव ं परिवार दा ेना ें म ें
निम्न ही होती ह ै। जहाॅ सामाजिक व्यवस्था दलिता ें के प ्रति द्वयम स्तर क े
नागरिक की तरह व्यवहार करती ह ै वही दलित परिवार में उत्पन्न ह ुई
महिलाओं का े इसकी दोगुनी यातनाएँ एवं पीड ़ा भोगनी होती ह ै। जाति व्यवस्थ
के सा ेपान क्रम में निम्नतम एव ं घ ृणित स्थिति, पुरूष प्रधान पितृसत्तात्मक
व्यवस्था में उप ेक्षित व्यवहार को सहना पड़ता ह ै। जो हमारे धर्म गं्रथो एवं
प ुराणों में दैवीय आदेशनुसार स्त्रिया ें का े ईश्वरीय आदेश की मानसिक बेडि ़या ें में
जकड़कर मना ेवैज्ञानिक रूप से पीडि ़त जीवन व्यतीत करने का पाठ पढ़ाती ह ै।
अर्था त् शारीरिक आ ैर मानसिक गुलामी एवं अत्याचार का े सहन करक े जीवन
व्यतीत करने आ ैर विरा ेध न कर पूर्व जन्मों एवं दैवीय आदेश मानकर स्वीकार
करने के सामाजिक विधानों के अ ुनसार पति परमेश्वर की धारणा का अनुसरण
करती र्ह ुइ सती होती ह ै जा ैहर करती ह ै।
प ्रस्तुत आलेख, जबलप ुर जिला के अनुस ूचित जाति कल्याण प ्रका ेष्ठ
में प ंजीबद्ध मामलों का े लिया गया ह ै। जो बलात्कार से पीड़ित दलित महिलाआ ें
पर केन्द्रित ह ै। जिसमें बलात्कार से पीड़ित दलित महिलाओं की सामाजिक
प ृष्ठभूमि का े ज्ञात किया गया है।
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