भारतीय महिलाओ की विकास यात्राः एक सिंहावलोकन (The Development of Progression of Indian Women: A Retrospect)
Srinkhala Ek Sodhparak
Vaicharik Patrika (P: ISSN NO.: 2321-290X RNI : UPBIL/2013/55327
VOL-7* ISSUE-11* July- 2020 E: ISSN NO.: 2349-980X)
Paper Submission: 05/07/2020, Date of Acceptance: 20/07/2020, Date of Publication: 21/07/2020
Abstract
असिस्टेंट प्रोफेसर,
राजनीति विज्ञान विभाग,
बाबा नारायणदास राजकीय
कला महाविद्यालय, चिमनपुरा,
शाहपुरा, जयपुर,
राजस्थान, भारत
भारत विश्व की सबसे प ुरानी सभ्यताआ ें में से एक ह ै जो विविधता म ें
एकता को दर्षा ता ह ै। एकत्व की इस भावना ने एक और भारतीय सभ्यता को
विश्व में सर्व श्रेष्ठ बनाया वहीं दूसरी ओर समय के प ्रवाह के साथ - साथ
अनेक नकारात्मक तत्वों ने जन्म लिया और उसे क्षति पहुचायी। ए ेसा ही एक
नकारात्मक तत्व था - समाज में महिलाओं का े प ुरूषा ें के समकक्ष न मानकर
हीन मानना। इस प ्रव ृत्ति ने भारतीय सभ्यता को बहुत क्षति पह ुॅचायी आ ैर
आधुनिक युग में अ ंग्र ेजा ें के समय में पतन की अन्तिम सीमा तक पह ुॅच र्गइ ।
विभिन्न समाज सुधारका ें एव ं महात्मा गाॅधी ने उसकी स्थिति का े उच्च बनाया
व स्वतंत्रता आंदा ेलन में सहभागी बनाया। स्वतं़त्रता प ्राप्ति के बाद संविधान में
विषेष प ्रावधान किए गए। 73 व ें एवं 74 व ें संषोंधन ने स्थानीय राजनीति में
न्यूनतम एक तिर्हाइ आरक्षण प ्रदान कर उनमें एक नवीन चेतना जागृत की।
आज वे समय से आगे निकलकर प ्रत्येक क्षेत्र में अपने पदचिन्हा ें की छाप छोड़
रही हैं ।
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