पंडित नेहरू राष्ट्रवाद एवं अंतरराष्ट्रीयवाद के पुरोधा (Pandit Nehru The Leader of Nationalism and Internationalism)
Srinkhala Ek Sodhparak
Vaicharik Patrika (P: ISSN NO.: 2321-290X RNI : UPBIL/2013/55327
VOL-7* ISSUE-11* July- 2020 E: ISSN NO.: 2349-980X)
Paper Submission: 15/07/2020, Date of Acceptance: 29/07/2020, Date of Publication: 30/07/2020
Abstract
सहायक आचार्य,
राजनीति विज्ञान विभाग,
राजकीय महाविद्यालय,
बूंदी, राजस्थान, भारत
सार रूप में यह कहा जा सकता है कि पं. नेहरू न केवल राष्ट्रवाद
अपितु अन्तर्रा ष्ट्रीयवाद के भी समृद्ध प ूरा ेदा माने जा सकते ह ैं। भारत की
विभिन्न प्रकार की विविधताओं एव ं मतभेदा ें को उन्हा ेंने भारत की कमजोरी नहीं
अपितु भारत की एक मजबूत ताकत के रूप में उभारने म ें अपनी महत्त्वपूर्ण
भूमिका निभाई ह ै। पंडित नेहरू आधुनिक भारत के न केवल निर्मा ता माने जाते
ह ैं अपितु ये संप्रभु राष्ट्र, समाजवाद, प ंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक एव ं गणतंत्रात्मक
व्यवस्था के वास्तविक शिल्पकार माने जाते ह ैं। इन्हा ेंने अन्तर्रा ष्ट्रीय राजनीति में
राष्ट्रा ें के व्यवहारिक एव ं आदर्श पूर्ण व्यवहार के लिए अनेक नवीन सिद्धान्त
प ्रतिपादित किये। जिनक े दर्श न हम प ंचशील समझा ैते के बिन्दुआ ें बाण्डूंग
सम्मेलन में दिये गये विचारों एव ं गुटनिरपेक्षता के सिद्धान्त के रूप में देख
सकते ह ैं। ये ए ेसे सिद्धान्त है ं जिनका अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में प ं. नेहरू से प ूर्व
किसी भी रूप में प ्रचलन नहीं था।
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