सामाजिक जीवन का एक दयनीय पक्ष: स्त्रियों का विडम्बित जीवन (A Pathetic Aspect of Social Life: The Ironic Life of Women)
Srinkhala Ek Sodhparak
Vaicharik Patrika (P: ISSN NO.: 2321-290X RNI : UPBIL/2013/55327
VOL-7* ISSUE-12* August- 2020 E: ISSN NO.: 2349-980X)
Paper Submission: 12/08/2020, Date ofAcceptance: 26/08/2020, Date of Publication: 27/08/2020
Abstract
पूनम त्रिपाठी
शोध छात्र,
हिन्दी विभाग,
ए0 पी0 एस0 विश्वविद्यालय,
रीवा, मध्य प्रदेश, भारत
्रस्तुत शोध पत्र जिसका शीर्ष क ह ै, ‘‘सामाजिक जीवन का एक
दयनीय पक्षः स्त्रियों का विडम्बित जीवन’’ में प ्राचीन काल से अद्यतन नारी
जीवन में आए विभिन्न परिवर्तना ें का े दर्शाया गया ह ै। इनकी दयनीय स्थिति को
साङ्गा ेपांग दर्शा ने के लिए विभिन्न संदर्भ ग्र ंथों का सहारा लिया गया ह ै। इस
शोधपत्र में स्त्रियों की स्थितियों के प ्रत्येक पहलू का े प ुष्ट एवं तथ्य परक बनाने
के उद्द ेश्य से विभिन्न साहित्यकार तथा विद्वानों के मता ें का सहारा लिया गया
ह ै। इस शोधपत्र में नारिया ें के जन्म से लेकर मृत्यु तक उनके जीवन को
विडम्बित करने वाली विविध व्यवस्थाओं का े परत दर परत उभारने की कोशिश
की र्गइ ह ै तथा उनके जीवन की विडम्बनाओं का े ता ेड़ने का सुझाव भी दिया
गया ह ै। प्रस्तुत शा ेधपत्र में आधुनिक नारियों की नवोन्वा ेषित चेतना तथा समाज
के निर्मा ण में इनके अप ्रतिम या ेगदान एव ं सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक,
साहित्यिक-सांस्कृतिक आदि विविध क्षेत्रें म ें इनके महत्त्वपूर्ण या ेगदान का े
दर्शा या गया है तथा व्यभिचार-दुराचार से निपटने के लिए उन सारे बिन्दुआ ें
पर सुझाव दिया गया ह ै, जो स्त्रियों के आत्म-सम्मान की रक्षा तथा मानवीय
मूल्या ें का े बचाने में सही कारगर हा ेगा। साहित्यावला ेकन की दृष्टि में नारी के
सम्मान के प्रत्येक पक्ष महत्त्वपूर्ण ह ंै, जिसकी वह हकदार है।
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