जलग्रहण कार्यक्रमो द्वारा पारिस्थितिकीय एवं आर्थिक पुर्नभरण नीम का थाना तहसील के सन्दर्भ में

Srinkhala Ek Sodhparak Vaicharik Patrika (04/SR-12/2020/13320Paper Submission: 00/00/2020, Date of Acceptance: 00/00/2020, Date of Publication: 00/00/2020

Abstract


सुरेश चंद्र जाट

प्राचार्य,

उच्च शिक्ष विभाग,

राजकीय महाविद्यालय,

वैर, राजस्थान, भारत


अंकुश कुमार मीना

सहायक आचार्य,

उच्च शिक्ष विभाग,

राजकीय महाविद्यालय,

राजाखेडा, राजस्थान, भारत



राहुल कुमार

शोध छात्र,

इ.ए.एफ.एम. विभाग,

राजस्थान विश्वविद्यालय,

जयपुर, राजस्थान, भारत

भारत में जल एव ं भू संरक्षण की विभिन्न या ेजनाओं के अन्तर्गत
जलग्रहण प ्रब ंधन की गतिविधियाँ 1970 के दषक में प ्रारंभ हो र्गइ  थीं। जिनका
समग्र रूप में जलग्रहण प ्रबधंन के रूप में क्रियान्वयन 1990 के दषक म ें
हनुमन्त राव समिति की सिफारिशों के रूप में प ्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम वास्तव
में सत्त विकास का एक जमीनी आधार था। जिसमें भ ूमि व जल सरंक्षण के
साथ कृषि, बागवानी व पशुधन विकास को मुख्य गतिविधियाँ बनायी र्गइ ।
प ्रस्तुत शोध कार्य में जलग्रहण का े एक इकाई मानकर मूल्या ंकन किया गया ह ै।
जिसमें प्राथमिक एवं द्वितीयक दोना ें तरह के आंकड ़ों का समाव ेश किया गया
ह ै। सम्प ूर्ण षा ेध कार्य में प ्रष्नावलिया ें के माध्यम से यह निष्कर्ष  प ्राप्त करने का
प ्रयास किया गया ह ै कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम द्वारा वास्तव में सत्त
विकास के लक्ष्य का े प ्राप्त किया गया ह ै अथवा नहीं। इसमें मुख्यतया
पारिस्थितिकीय एवं आर्थि क पुनर्भ रण के लिए क्रियान्वित गतिविधिया ें का
तुलनात्मक विश्लेषण करके इनकी सफलता का मूल्या ंकन किया गया ह ै।

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