सामाजिक न्याय की अवधारणा मे डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर का योगदान Dr. Bhimrao Ambedkar's Contribution to The Concept of Social Justice
Anthology The Research:(ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021)
राजनीति विभाग, राजनीति विभाग,
सहायक प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक,
शा0 कन्या स्नातकोत्तर शा0 कन्या स्नातकोत्तर
महाविद्यालय, सीधी, महाविद्यालय, सीधी,
मध्य प्रदेश, भारत मध्य प्रदेश, भारत
Abstract
इसके बिना समाज का अस्तित्व संकट में पड ़ सकता ह ै आ ैर धीरे-धीरे वह
समाज विलुप्त भी हा े सकता ह ै। वस्तुतः सामाजिक न्याय की स्थापना किसी भी
समाज का प्रथम लक्ष्य हा ेना चाहिए। भारत में भी स्वतंत्रता के पश्चात् जब
संविधान का े लागू किया गया ता े उसमें इस लक्ष्य का े अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान
दिया गया। प्रस्तावना से लेकर अनेक ए ेसे प ्रावधान किए गए जिसस े सामाजिक
न्याय की स्थापना को बल मिले। इसके बावजूद इसे भारतीय समाज का
दुर्भा ग्य ही कहा जाएगा कि संव ैधानिक प ्रावधानों के उपरा ंत आज भी भारतीय
समाज में सामाजिक न्याय, दलित उत्पीड़न, भेदभाव व छुआछूत सर्व त्र व्याप्त
ह ै।
सामाजिक न्याय से अर्थ है, कि समाज में रहने वाले प ्रत्येक व्यक्ति
का े बिना उसके धर्म व जाति ध्यान म ें रख े, जीवन की मूलभूत अनिवार्य
आवश्यकताओं का े जैसे-भोजन, कपड़ा आ ैर मकान की पूर्ति हो, प ्रत्येक व्यक्ति
का े सामाजिक एवं आर्थिक विकास का समुचित अवसर प ्रदान हो, मानव का
मानव द्वारा शोषण न किया जावे आ ैर आर्थि क सत्ता का विकेन्द्रीकरण हा े।
तथा राजनीतिक शक्ति में सभी की समान भागीदारी हा े।
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