सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता स ंग्राम में दलिता ें की भूमिका Role of Dalits in the First Freedom Struggle of 1857
Anthology The Research:(ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021)
आई. आर सोनवानी
प्राचार्य,
इतिहास विभाग,
शासकीय शिवनाथ विज्ञान
महाविद्यालय, राजनांदगांव,
छ.ग, भारत
प्राचार्य,
इतिहास विभाग,
शासकीय शिवनाथ विज्ञान
महाविद्यालय, राजनांदगांव,
छ.ग, भारत
फुलसा े राज ेश पटेल
सहायक प्राचार्य,
इतिहास विभाग,
शासकीय शिवनाथ विज्ञान
महाविद्यालय, राजनांदगांव,
छ.ग, भारत
सहायक प्राचार्य,
इतिहास विभाग,
शासकीय शिवनाथ विज्ञान
महाविद्यालय, राजनांदगांव,
छ.ग, भारत
Abstract
सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, भारत का प ्रथम स्वतंत्रता संग्राम
ए ेतिहासिक, राजनीतिक, आर्थि क एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक
महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प ्रसिद्ध है। कई इतिहासकारों ने इसे
महान विद्रा ेह, किसानों का विद्रा ेह, सिपाहिया ें के द्वारा असंतुष्ट होकर किया
गया सिपाही आन्दोलन तथा राजा-महाराजा या प्रादेशिक राजाआ ें के द्वारा
किया गया विद्रा ेह माना है। भारतीय इतिहासकारों ने सर्व मान्य से इस बात को
स्वीकार किया ह ै कि, पहली बार भारत के समस्त वर्ग जिसमें राजा-महाराजा,
साधारण किसान, हिन्दू-मुस्लिम तथा भारत में रहने वाले जनसामान्य वर्ग भी
बि ्रट्रिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए पहली बार कंध े से कंधा मिलाकर इस
आन्दा ेलन में भाग लिया था। यद्यपि तथाकथित कारणों से यह महासंग्राम
सफल नहीं हा े सका तथापि भारतीय इतिहासकारों के द्वारा इसे जन आन्दा ेलन
के नाम से परिभाषित किया है। इस आन्दा ेलन में भारत में रहने वाले दलित
वर्गा ें ने भी उल्लेखनीय या ेगदान दिया ह ै, उनके या ेगदान का े विस्मृत नहीं
किया जा सकता है।
ए ेतिहासिक, राजनीतिक, आर्थि क एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक
महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प ्रसिद्ध है। कई इतिहासकारों ने इसे
महान विद्रा ेह, किसानों का विद्रा ेह, सिपाहिया ें के द्वारा असंतुष्ट होकर किया
गया सिपाही आन्दोलन तथा राजा-महाराजा या प्रादेशिक राजाआ ें के द्वारा
किया गया विद्रा ेह माना है। भारतीय इतिहासकारों ने सर्व मान्य से इस बात को
स्वीकार किया ह ै कि, पहली बार भारत के समस्त वर्ग जिसमें राजा-महाराजा,
साधारण किसान, हिन्दू-मुस्लिम तथा भारत में रहने वाले जनसामान्य वर्ग भी
बि ्रट्रिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए पहली बार कंध े से कंधा मिलाकर इस
आन्दा ेलन में भाग लिया था। यद्यपि तथाकथित कारणों से यह महासंग्राम
सफल नहीं हा े सका तथापि भारतीय इतिहासकारों के द्वारा इसे जन आन्दा ेलन
के नाम से परिभाषित किया है। इस आन्दा ेलन में भारत में रहने वाले दलित
वर्गा ें ने भी उल्लेखनीय या ेगदान दिया ह ै, उनके या ेगदान का े विस्मृत नहीं
किया जा सकता है।
The freedom struggle of 1857, India's first freedom struggle is
famous as a very important freedom struggle from historical, political,
economic and cultural point of view. It has been considered by many
historians to be a great revolt, peasant revolt, the Sepoy movement made
by the soldiers disgruntled and the revolt by the king-maharaja or
territorial kings. Indian historians have universally accepted that, for the
first time, all sections of India, including the King-Maharaja, ordinary
peasants, Hindu-Muslims and the masses of people living in India, also
stood shoulder to shoulder for the first time to overthrow the British power.
Took part in this movement together. Although this Mahasangram could
not succeed due to so-called reasons, however, it has been defined by
Indian historians as the people's movement. The Dalit classes living in
India have also contributed significantly in this movement, their
contribution cannot be forgotten.
for full paper please visit
below link http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/407/2103230103321st%20sonwani%2013647.pdf


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