मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले मे ं आधुनिक शिक्षा का विकास क ऐतिहासिक विव ेचन (1867 से 1975 ई. तक) Historical analysis of the Development of modern education in Balaghat District of Madhya Pradesh (1867 to 1975 AD)
Anthology The Research:(ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-10* January-2021)
Paper Submission: 15/01/2020, Date of Acceptance: 26/01/2020, Date of Publication: 27/01/2021
गीता ंजली सरयाम
शोधार्थी,
इतिहास विभाग,
राजकीय स्वायत्तशासी पी.जीकलेज, छिंदवाड़ा, भारत
शोधार्थी,
इतिहास विभाग,
राजकीय स्वायत्तशासी पी.जीकलेज, छिंदवाड़ा, भारत
Abstract
मध्यप ्रदेश की सतपुड़ा पर्वतमाला के पूर्वी भाग में स्थित बालाघाट
जिले की राजनीतिक, सामाजिक एवं सा ंस्कृतिक परम्परायंे व ैविध्यप ूर्ण रही है ं।
बि ्रटिश शासन की स्थापना के प ूर्व यहाँ के गा ेण्ड तथा मराठा (भोंसला)
राजवंशा ें का शासन था। इन शासकों का शिक्षा के विकास के प ्रति दृष्टिकोण
सर्व था भिन्न था। यही कारण था कि इनके राज्यकाल में बालाघाट जिले के
भू-भाग में शिक्षा की र्कोइ निश्चित पध्दति प ्रचलित नहीं थी। 185र्4 इ . मंे यह
क्षेत्र आ ैपचारिक रूप से बि ्रटिश साम्राज्यन्तर्गत हो गया। उसी समय से यहाँ
आधुनिक अथवा पाष्चात्य शिक्षा का प्रादुर्भाव ह ुआ।
बालाघाट जिले के श ैक्षणिक विकास का अध्ययन करने पर पता
चलता ह ै कि यहाँ शिक्षा के प ्रचार-प्रसार की गति काफी मन्द थी। 1947
अर्था त् भारत की आजादी तक अंग्र ेज षासकों का ध्यान केवल विद्यालयीन
शिक्षा पर ही केन्द्रित रहा। उच्च, तकनीकी एव ं व्यावसायिक शिक्षा की और
विषेष ध्यान नहीं दिया गया। जिले में स्त्री शिक्षा की स्थिति अत्यंत दयनीय
बनी रही। मध्यप ्रांत की राजधानी नागप ुर की निकटता के बावजूद अ ंग्र ेजी
शासन ने बालाघाट जिले में शिक्षा का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नही ं किया। यह भी
सत्य ह ै कि स्वतंत्रता प ्राप्ति और राज्य प ुनर्गठन क े बाद मध्यप ्रदेश सरकार द्वारा
शिक्षा की प्रगति के लिये किये गये प ्रयास अपर्या प्त सिध्द ह ुये। जिला प्रदेश
अन्य जिला ें की तुलना में काफी पिछड़ा ह ुआ था। निष्कर्ष तः यही कहा जा
सकता ह ै कि जिले में शिक्षा के सर्वा ंगीण विकास के लिये आ ैर अधिक प्रयासा ें
की महत्वप ूर्ण आवश्यकता थी।
जिले की राजनीतिक, सामाजिक एवं सा ंस्कृतिक परम्परायंे व ैविध्यप ूर्ण रही है ं।
बि ्रटिश शासन की स्थापना के प ूर्व यहाँ के गा ेण्ड तथा मराठा (भोंसला)
राजवंशा ें का शासन था। इन शासकों का शिक्षा के विकास के प ्रति दृष्टिकोण
सर्व था भिन्न था। यही कारण था कि इनके राज्यकाल में बालाघाट जिले के
भू-भाग में शिक्षा की र्कोइ निश्चित पध्दति प ्रचलित नहीं थी। 185र्4 इ . मंे यह
क्षेत्र आ ैपचारिक रूप से बि ्रटिश साम्राज्यन्तर्गत हो गया। उसी समय से यहाँ
आधुनिक अथवा पाष्चात्य शिक्षा का प्रादुर्भाव ह ुआ।
बालाघाट जिले के श ैक्षणिक विकास का अध्ययन करने पर पता
चलता ह ै कि यहाँ शिक्षा के प ्रचार-प्रसार की गति काफी मन्द थी। 1947
अर्था त् भारत की आजादी तक अंग्र ेज षासकों का ध्यान केवल विद्यालयीन
शिक्षा पर ही केन्द्रित रहा। उच्च, तकनीकी एव ं व्यावसायिक शिक्षा की और
विषेष ध्यान नहीं दिया गया। जिले में स्त्री शिक्षा की स्थिति अत्यंत दयनीय
बनी रही। मध्यप ्रांत की राजधानी नागप ुर की निकटता के बावजूद अ ंग्र ेजी
शासन ने बालाघाट जिले में शिक्षा का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नही ं किया। यह भी
सत्य ह ै कि स्वतंत्रता प ्राप्ति और राज्य प ुनर्गठन क े बाद मध्यप ्रदेश सरकार द्वारा
शिक्षा की प्रगति के लिये किये गये प ्रयास अपर्या प्त सिध्द ह ुये। जिला प्रदेश
अन्य जिला ें की तुलना में काफी पिछड़ा ह ुआ था। निष्कर्ष तः यही कहा जा
सकता ह ै कि जिले में शिक्षा के सर्वा ंगीण विकास के लिये आ ैर अधिक प्रयासा ें
की महत्वप ूर्ण आवश्यकता थी।
The political, social and cultural traditions of Balaghat district
located in the eastern part of the Satpura ranges of Madhya Pradesh
have been varied. Before the establishment of British rule, the Gond and
Maratha (Bhonsala) dynasties ruled here. The attitude of these rulers
towards the development of education was completely different. This was
the reason that during his reign there was no definite system of education
in the terrain of Balaghat district. In 1854 AD, this area formally became
under the British Empire. From the same time modern or western
education emerged here.
A study of the educational development of Balaghat district
shows that the pace of propagation of education was very slow here. Till
1947, ie, until the independence of India, the focus of British rulers was
focused only on school education. Higher, technical and vocational
education was not given special attention. The condition of female
education in the district remained extremely pathetic. Despite the
proximity of the capital of Madhya Pradesh to Nagpur, the British did not
promote education sufficiently in the Balaghat district. It is also true that
the efforts made by the Madhya Pradesh government for progress of
education after the attainment of independence and reorganization of the
state proved insufficient. The district state was quite backward compared
to other districts. In conclusion, it can be said that more efforts were
needed for the all-round development of education in the district.
http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/407/2103230104031st%20geetanjali%20saryam%2013657.pdf

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