सैन्धव सभ्यता का एक धार्मिक कृत्य: वृषभ मेध A Religious Act of The Sandhav Civilization: Taurus Merit
Anthology The Research:(ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-9* December-2020)
सहयुक्त आचार्य,
प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं
संस्क ृति विभाग,
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर
वि‛वविद्यालय, गोरखपुर,
उत्तर प्रदे‛ा, भारत
Abstract
दूसरी ग्रामीण। वृषभ का महत्व दा ेना ें ही सभ्यताओं में समानरुप से दिखलाई
पड़ता ह ै एक ओर वह कृषि के लिए साधन ह ै ता े व्यापार के लिये वाहक
।सैंधव सभ्यता के खिलौने आ ैर मुहरों पर बह ुतायत संख्या में व ृषभ का मिलना
इस बात का संकेत करता है कि वह ला ेक आस्था से जुड़ा पश ु था ।वैदिक
ग्रन्थ इस बात के साक्षी ह ै कि व ृषभ कृषि के साथ ही धन तथा बल दा ेना ें का
प्रतीक था रा ेचक बात यह ह ै कि त्रिशीर्ष परम्परा जिसका उल्लेख श्र ृग्वेद
,तैत्रिरीय आरण्यक ,शतपथ ब ्राह्मण ,का ेषितकी ब ्राह्मण में मिलता ह ै ।वर्ह इ रानी
धर्म ग्रन्थ अवेस्ता में भी थिज्र यान एव ं क्ष्वष -उर्षा केथ ्र, अतै आना े आख्यानों म े ं
भी मिलता ह ै ।अव ेस्ता की त्रिशीर्ष परम्परा ब ेबिलोन आनाता ेलिया के माध्यम से
हित्ति देव मण्डल में स्थान पाया जिसकी पुष्टि प ुरातात्विक साक्ष्य भी करते ह ै ं।
इन संस्कृतिया ें में व ृषभ का धार्मिक आभिचारिक कृत्यों से सम्बन्ध था। वृषभ
प ूजन व बलि के विधान के साक्ष्य मिलते ह ै ं। ए ेसी ही परम्परा सै ंधव सभ्यता में
थी।
http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/403/2102100951551st%20dhyanendra%20narayan%20dubey.pdf

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