इक्कीसवी ं सदी में हिंदी संस्मरणात्मक साहित्य का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप, वर्गीकरण, विकास एवं अन्य विधाआ ें के साथ तुलनात्मक अध्ययन’’ Study of The Meaning, Definition, Form, Classification and Development of Memoirs in Hindi Literature in the Twenty-First Century and Comparison with Other Genres
Anthology The Research:(ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-11* February-2021 )
शोधार्थी,
हिन्दी विभाग,
राजकीय कला महाविद्यालय,
कोटा, राजस्थान, भारत
Abstract
आलेख को संस्मरण कहलाता ह ै। संस्मरण विधा मनुष्य के लिए एक उत्सुकता
का विषय ह ै। संस्मरण विधा में शोध कार्य करते समय न जाने कितने लोगा ें के
चरित्रा ें से हमें जीवन जीने की प ्रेरणा मिल गयी। किसी घटना या व्यक्ति से
सम्बन्धित अनुभ ूति जब लेखक के हृदय पटल पर आकर मन के भीतर ही
भीतर कुरेदती ह ै तब वह अनुभ ूति अभिव्यक्ति के रूप में साकार हा े संस्मरण
बन जाती ह ै। संस्मरण लेखक के निजी जीवन की घटनाआ ें पर आधारित होता
ह ै। यह लेखक का अपना अनुभव हा ेते होते ह ुए भी दूसरे के जीवन को
उद्घाटित करता ह ै जिससे तत्कालीन परिस्थिति का बोध हा ेता ह ै। संस्मरण म ें
लेखक अपने जीवन के अतीत में पह ुँचकर अपने स्मृतिकोश में सुरक्षित व्यक्ति,
वस्तु, दृश्य या घटना का वर्ण न इस ढंग से करता ह ै कि वण्र्य-वस्तु सजीव
रूप में पाठक के सम्मुख उपस्थित हो जाती ह ै। स्मृति के आधार पर ह ें
स्मरणीय व्यक्ति के आत्मीय सम्बन्ध से जोड ़ती ह ै। संस्मरण साहित्य एक
स्वतंत्र विधा के रूप में विकसित ह ुआ है। सदैव यह पाठका ें के लिए
प ्रेरणादायक है।
http://socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/410/2103301143341st%20gajanand%20meena%2013872.pdf

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