राष्ट्रीय आंदोलन में प्रगतिवादी चेतना का उदय (1934-47 की पत्र-पत्रिकाओं के विशेष संदर्भ में) Rise of Progressive Consciousness in the National Movement (With Special Reference to The Periodicals of 1934-47)
Anthology : The Research ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-5* Issue-12* March-2021
सहायक प्राध्यापक,
इतिहास विभाग,
शासकीय महाविद्यालय
ज ैतहरी अनूपपुर म.प्र. भारत
Abstract
एवं साहित्य सर्ज न के क्षेत्र में समाजवादी विचारा ें का प्रव ेश हुआ था। जिसके
परिणामस्वरूप 1935 में का ंग्र ेस समाजवादी दल का उदय तथा साहित्य क्षेत्र म ें
1935 में भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई। इन सभी का प्रभाव
तत्कालीन पत्रकारिता पर भी पड ़ा था। इन पत्र-पत्रिकाआ ें ने अपने राष्ट्रीय
दायित्वा ें का निर्वहन करते ह ुए राष्ट्रीय आंदा ेलन मे ं आम लोगा ें की भागीदारी
का े प्रभावपूर्ण तरीके से व्यक्त करते ह ुये समाजवादी व्यवस्था का प ुरजा ेर समर्थन
किया। तत्कालीन पत्र-पत्रिकाआ ें में जागरण, विप्लव, नया हिंदुस्तान, क्रांति
आदि प्रमुख थे। इन पत्रिकाओं ने जहाँ फासीवाद आ ैर पूँजीवाद की ब ुराइयों
आ ैर दूसरों को बताया, वहीं दूसरी ओर निम्न वर्ग को इनसे मुक्ति का मार्ग भी
बताया। निम्न वर्ग के अतिरिक्त स्त्रिया ें के अधिकार आ ैर अपने समाज में प ुरुषा ें
के समान दर्जा देने की बात की सशक्त अभिव्यक्ति की गई।
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