ए॰ए॰ अल्मेलकर का कला संसार The Art world of A.A. Almelker

  Innovation : The Research Concept ISSN No. 2456–5474  RNI No. UPBIL/2016/68367 VOL- VI * ISSUE- IV * May - 2021  

 Paper Submission: 03/06/2021, Date of Acceptance: 14/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021

 








नमिता त्यागी
सहायक प्राध्यापक,
चित्रकला विभाग,
दयालबाग एजूकेशनल
इन्स्टीयूट,
दयालबाग, आगरा, भारत


 

                                                   Abstract

 अब्दुल रहीम अप्पाभाई अल्मेलकरचित्रकारी के परम्परागत श ैली के
पोषक थे। दृश्य चित्रण के पश्चात्, ग्रामीण एवं लोक जीवन, भारतीय श ैली के
स्त्री प ुरुष व काल्पनिक विषया ें जैसे राजा-रानी, नायक-नायिका, ए ेतिहासिक
चित्र जिनमें मुगल, राजप ूत, पहाड़ी श ैली से प ्रभावित चित्र, इसक े अतिरिक्त
आदिवासी मछुआरे, अनुसूचित जाति के लोगा ें के चित्र यह वह जीवन भर
बनाते रहे।आप आदिवासी जीवन के हल्के-फ ुल्के क्षणों तथा आनन्दमय पलों
का े चित्रित करने के पक्षधर रहे, ग्राम्य जीवन के साथ प्राकृतिक सुन्दरता को
आपने अपने चित्रों में अप ्रतिम रूप प्रदान किया।
श्री आल्मेलकर ने जल रंग, तैल रंग दा ेना ें म ें ही कार्य किया, साथ ही
साथ टेम्परा, ग्वाश एवं मिश्रित माध्यम का प ्रयोग करक े आपने अपनी
सृजनशील रचनात्मकता का परिचय दिया। विषयानुरूप रंगा ें के चयन में आप
सिद्धहस्त थे, रंगा ें की आलोकित आभा आपके प ्रत्येक चित्र का े एक नूतन रूप
प ्रदान करती थी। कला के ये दा े तत्त्व रंग एवं रेखा का वर्चस्व आपकी कृतिया ें
में सदैव देखने को मिलता ह ै। मलेशिया, सिंगाप ुर इण्डा ेनेशिया सीलोन, जावा
एवं कम्बा ेडिया जैसे विभिन्न एशियाई देशों की यात्राओं ने आपके कला जीवन
का े प ्रभावित अवश्य किया किन्तु आपकी कला जडं़े सदैव भारतीयता से जुड ़ी
रही।सन् 1955 के आसपास आल्मेलकर ने अपनी एक नयी रचनात्मक श ैली
विकसित की जो अपने आकारों, संरचना एवं रंग या ेजना में मध्यकालीन लघु
चित्रण श ैली को आत्मसात् करती थी। सन् 1968 में वह सर जे0ज े0 स्कूल
आॅफ आर्टस, बम्बई में लेक्चरर के पद पर नियुक्त ह ुए। अनुभवप ूर्ण कला सेवा
तथा अपूर्व सृजन के सामथ्र्य के साथ आप निरन्तर विद्यार्थि या ें का े अपने
मौलिक स्वरूप को विकसित करने की प ्रेरणा देते रहे।श्री आल्मेलकर अपनी
कृतियों के माध्यम से सदैव भारतीयता से जुड़े रहे, उस समय जब एक ओर
कला प ्रा ेगेसिव आर्टिस ग्र ुप के कलाकारा ें के अभिनव प ्रयोगा ें की देख रही थी
वहीं एक ओर कलाकारों का वह वर्ग भी था जा े परम्परावादी कार्यशैली का े
अपनी सृजनशीलता से आलोकित कर रहा था श्री आल्मेलकर उन्ही ं में से एक
थे।
Abdul Rahim Appabhai Almelkar was a patron of the traditional style of painting. After the visual depiction, rural and folk life, Indian style of men and women and fictional subjects like king-queen, hero-heroine, historical paintings in which pictures influenced by Mughal, Rajput, Pahari style, besides tribal fishermen, scheduled caste people. He continued to paint this picture throughout his life. You were in favor of painting the light moments and joyful moments of tribal life, you gave an unparalleled form to the natural beauty of rural life in your paintings

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