ज ैव विविधताः वैश्विक क्षरण व गहराता संकट
Anthology : The Research ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-3* June- 2021
Paper Submission: 03/06/2021, Date of Acceptance: 14/06/2021, Date of Publication: 25/06/2021
सहायक प्राध्यापक,
राजनीति विज्ञान विभाग,
राजकीय महाविद्यालय,
टोंक राजस्थान, भारत
Abstract
हमारे लिए खाद्य पदार्थों, ड्रग्स एवं दर्वाइ या ें, सा ैन्दर्या त्मक एव ं सा ंस्कृतिक दृष्टि
से महत्वपूर्ण हा ेने के साथ-साथ पारिस्थितिकीय दृष्टि से भी लाभदायक ह ै।
जैव विविधता मृदा निर्माण, मृदा अपरदन की रोकथाम, अपशिष्ट का पुनः चक्रण
आ ैर परागण द्वारा मानव अस्तित्व का आधार बनी र्ह ुइ ह ै। किन्तु विडम्बना यह
ह ै कि जीवित संसाधना ें का विनाश जारी है जिससे परितंत्र का े क्षति हा े रही
ह ै। संभवतयाः समस्त विश्व इस ओर चिंतित ह ै। निकट भविष्य में शायद
समस्त विश्व इस क्षरण को रा ेकने में सफल हा ेगा।
http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/437/2106300115331st%20rajni%20taiswal%2014364.pdf

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