विश्व चेतना की जागरूकता मे ं गांधी दर्शन Gandhi Philosophy in Awareness of World Consciousness
Anthology : The Research ISSN: 2456–4397 RNI No.UPBIL/2016/68067 Vol-6* Issue-2* May- 2021
Paper Submission: 03/05/2021, Date of Acceptance: 17/05/2021, Date of Publication: 25/05/202
प्रीति बाला तिवारी
सहायक प्राध्यापक,
शिक्षा विभाग,
राजीव एक ेडमी फार
ट ेक्नालाजी एण्ड मैनेजमेंट,
मथुरा, उत्तर प्रदेश, भारत
Abstract
विश्व चेतना की जागरूकता में गांधीवादी विचारधारा के दो आधारभूत
सिद्धांत थ े। सत्य, अहि ंसा विश्व के लिए उनका संदेश था जहां सत्य है वहां ईश्वर व
नैतिकता इसका आधार है। विश्व मानव समाज के लिए अहिंसक मानव होना बहुत
जरूरी है क्योंकि अहिंसा का अर्थ होता है प्रेम व उतारता की पराकाष्ठा।
उनके अनुसार- विश्व अहिंसक मानव किसी दूसरे को कभी भी मानसिक व
शारीरिक पीड़ा नहीं पहुंचाता है। विश्व चेतना की जागरूकता में उन्होंने सर्वोदय,
ट्रस्टीशिप, सत्याग्रह विचारधारा को ही अपना कर विश्व मानव को जागरूक करने म ें
अपना संपूर्ण योगदान दिया। सत्य, अहिंसा के आदर्श गांधी जी ने संपूर्ण दर्शन को
मानव जाति क े लिए अत्यंत प्रसांगिक बताया है। गांधी जी की शिक्षाएं विश्व में आज
और अधिक प्रसांगिक हा े गई है ं जबकि आज मानव अत्यधिक लालची व्यापक स्तर पर
हिंसात्मक वा भागदौड़ भरी जि ंदगी का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका में मार्टिन लूथर, दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंड ेला, म्यांमार में आंग सान सू
ज ैसे लोगों क े न ेतृत्व में उत्पीड़ित समाज क े लोगों को न्याय दिलाने हेतु गांधी
विचारधारा को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। जो कि विश्व पटल पर विश्व च ेतना
की जागरूकता की घटनाओं का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
वर्तमान समय में आज हमारा राष्ट्र, समाज विश्वशांति, विश्व युद्ध भविष्य
अध्यात्मा व भा ैतिकवाद, लोकतंत्र व अधिनायकवाद क े बीच एक बड़ा युद्ध चल रहा है।
इन बड़े युद्धों को लड़ने क े लिए आज वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को गांधी दर्शन
क े सिद्धांतों को अपनाना जरूरी हो गया है। गांधी जी ने विश्व मानव बाद को एक
सिद्धांत व अमूर्ता क े रूप में परिभाषित न करके प्रयोगवादी संस्था क े रूप में व्यक्त
किया। इस मानव चेतना की जागरूकता में मानव का मानव के प्रति, ईश्वर के प्रति
अनंत, अतुल अपरिमित प्रतिबद्धता निहित है। उन्होंने कहा है कि हम विश्व मानव हैं
उन्होंने हिंद स्वराज पुस्तक में लिखा है कि सभी मानव धर्म एक ही जगह पर पहुंचने
क े लिए अलग-अलग रास्ते है ं आज जो हमारे चारों ओर घट रहा है वह गांधी जी के
सिद्धांतों की उपेक्षा और गैर सिद्धांतों का सिंहासन पर बिठाना है।
सिद्धांत थ े। सत्य, अहि ंसा विश्व के लिए उनका संदेश था जहां सत्य है वहां ईश्वर व
नैतिकता इसका आधार है। विश्व मानव समाज के लिए अहिंसक मानव होना बहुत
जरूरी है क्योंकि अहिंसा का अर्थ होता है प्रेम व उतारता की पराकाष्ठा।
उनके अनुसार- विश्व अहिंसक मानव किसी दूसरे को कभी भी मानसिक व
शारीरिक पीड़ा नहीं पहुंचाता है। विश्व चेतना की जागरूकता में उन्होंने सर्वोदय,
ट्रस्टीशिप, सत्याग्रह विचारधारा को ही अपना कर विश्व मानव को जागरूक करने म ें
अपना संपूर्ण योगदान दिया। सत्य, अहिंसा के आदर्श गांधी जी ने संपूर्ण दर्शन को
मानव जाति क े लिए अत्यंत प्रसांगिक बताया है। गांधी जी की शिक्षाएं विश्व में आज
और अधिक प्रसांगिक हा े गई है ं जबकि आज मानव अत्यधिक लालची व्यापक स्तर पर
हिंसात्मक वा भागदौड़ भरी जि ंदगी का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका में मार्टिन लूथर, दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंड ेला, म्यांमार में आंग सान सू
ज ैसे लोगों क े न ेतृत्व में उत्पीड़ित समाज क े लोगों को न्याय दिलाने हेतु गांधी
विचारधारा को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। जो कि विश्व पटल पर विश्व च ेतना
की जागरूकता की घटनाओं का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
वर्तमान समय में आज हमारा राष्ट्र, समाज विश्वशांति, विश्व युद्ध भविष्य
अध्यात्मा व भा ैतिकवाद, लोकतंत्र व अधिनायकवाद क े बीच एक बड़ा युद्ध चल रहा है।
इन बड़े युद्धों को लड़ने क े लिए आज वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को गांधी दर्शन
क े सिद्धांतों को अपनाना जरूरी हो गया है। गांधी जी ने विश्व मानव बाद को एक
सिद्धांत व अमूर्ता क े रूप में परिभाषित न करके प्रयोगवादी संस्था क े रूप में व्यक्त
किया। इस मानव चेतना की जागरूकता में मानव का मानव के प्रति, ईश्वर के प्रति
अनंत, अतुल अपरिमित प्रतिबद्धता निहित है। उन्होंने कहा है कि हम विश्व मानव हैं
उन्होंने हिंद स्वराज पुस्तक में लिखा है कि सभी मानव धर्म एक ही जगह पर पहुंचने
क े लिए अलग-अलग रास्ते है ं आज जो हमारे चारों ओर घट रहा है वह गांधी जी के
सिद्धांतों की उपेक्षा और गैर सिद्धांतों का सिंहासन पर बिठाना है।
Gandhian ideology had two fundamental principles in awareness of
world consciousness. Truth, non-violence was his message to the world, where
truth is there, God and morality are its basis. Being a non-violent human is very
important for the world human society because non-violence means the
culmination of love and descent. According to him, the world non-violent human
being never causes mental and physical suffering to anyone. In the awareness of
world consciousness, he made his full contribution in making the world human
aware by adopting Sarvodaya, Trusteeship, Satyagraha ideology. Truth, the ideal
of non-violence Gandhiji has described the entire philosophy as very relevant to
mankind. Gandhiji's teachings have become more relevant in the world today,
whereas today human beings are trying to find solutions to extreme, greedy, violent
and violent life on a large scale. Gandhi ideology has been successfully
implemented to provide justice to the people of oppressed society led by people
like Martin Luther in America, Nelson Mandela in South Africa, Aung San Suu in
Myanmar. Which is a direct example of the awareness of world consciousness on
the world stage? Today, there is a big war going on between our nation, society,
world peace, world war, future ideology and materialism, democracy and
totalitarianism. In order to fight these big wars, today it is necessary for every
person to adopt the principles of Gandhi philosophy. Gandhiji, instead of defining
the world human society as a principle and immortality, expressed it as an
experimental institution. In the awareness of this human consciousness, there is an
infinite, infinitely infinite commitment of man towards God, towards God. He has
said that we are world human. He has written in the book Hind Swaraj that all
human religions are different ways to reach the same place. Today what is
happening around us is the neglect of Gandhi's principles and non-principles. To sit
on the throne
for full paper please visit below link :
http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/7/433/2106291049001st%20priti%20bala%20tiwari%2014185.pdf

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