श्रीहर्ष के न ैषधीयचरितम् में व्याप्त दार्श निक तत्व Philosophical Elements Pervading Sri Harsha's Nadiadhicharitam
Shrinkhla Ek Shodhparak Vaicharik Patrika : ISSN NO.: 2321-290X
RNI : UPBIL/2013/55327 VOL-8* ISSUE-7* March- 2021
RNI : UPBIL/2013/55327 VOL-8* ISSUE-7* March- 2021
पुष्पा
सह आचार्य,
संस्क ृत विभाग,
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त
विश्वविद्यालय,
नई दिल्ली, भारत
सह आचार्य,
संस्क ृत विभाग,
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त
विश्वविद्यालय,
नई दिल्ली, भारत
Abstract
श्रीहर्ष ने अपने महाकाव्य नैषधीयचरितम् में दार्श निक तत्व जैसे सृष्टि,
भाग्यवाद, जन्म-मृत्यु, पुनर्जन्म, कर्म-फल, मोक्ष , स्वर्ग-नर्क, आत्मा और
परमात्मा इत्यादि विषयों पर भरप ूर प्रकाश डाला ह ै। महाकवि ने भारतीय नौ
दर्श नों पर (छह आस्तिक दर्श न, तीन नास्तिक दर्श न ) श्लोका ें के माध्यम से
अपने विचारों को प्रकट किया ह ै। यह श्र ृंगार प्रधान रचना ह ै परंतु फिर भी
इसमें दार्श निकता का प ुट मिलता ह ै।
भाग्यवाद, जन्म-मृत्यु, पुनर्जन्म, कर्म-फल, मोक्ष , स्वर्ग-नर्क, आत्मा और
परमात्मा इत्यादि विषयों पर भरप ूर प्रकाश डाला ह ै। महाकवि ने भारतीय नौ
दर्श नों पर (छह आस्तिक दर्श न, तीन नास्तिक दर्श न ) श्लोका ें के माध्यम से
अपने विचारों को प्रकट किया ह ै। यह श्र ृंगार प्रधान रचना ह ै परंतु फिर भी
इसमें दार्श निकता का प ुट मिलता ह ै।
Shriharasha has given a lot of light on philosophical elements
such as creation, fatalism, birth-death, rebirth, karma-fruit, salvation,
heaven-hell, soul and God etc. in his epic Naashadhicharitam. The
Mahakavi has revealed his views on the nine Indian philosophies (six
believer philosophies, three atheistic philosophies) through verses. It is a
makeup predominant work, but still there is a touch of philosophicality in
it.
http://www.socialresearchfoundation.com/upoadreserchpapers/3/418/2105251145391st%20pushpa%2014028.pdf

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